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समस्तीपुर में प्रभारी मंत्री दामोदर रावत का सख्त संदेश, जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और गैरहाजिर अफसरों पर होगी कार्रवाई

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समस्तीपुर समाहरणालय में जिला कार्यक्रम एवं कार्यान्वयन समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री दामोदर रावत ने जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के त्वरित समाधान के निर्देश दिए। बैठक से गैरहाजिर अधिकारियों पर कार्रवाई और वेतन कटौती की चेतावनी भी दी।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के विकास कार्यों, जनहित योजनाओं और विभिन्न विभागों की प्रगति की समीक्षा को लेकर शनिवार को समाहरणालय सभागार में जिला कार्यक्रम एवं कार्यान्वयन समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बिहार सरकार के परिवहन मंत्री सह समस्तीपुर जिले के प्रभारी मंत्री दामोदर रावत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को मजबूती से उठाया, वहीं प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने शिकायतों और सुझावों के समयबद्ध निष्पादन का निर्देश देते हुए कहा कि विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बैठक की शुरुआत स्वागत कार्यक्रम के साथ हुई। प्रभारी मंत्री दामोदर रावत का बुके और पौधा भेंट कर अभिनंदन किया गया। इसके बाद उपस्थित सांसदों, विधायकों, विधान पार्षदों और अन्य जनप्रतिनिधियों का भी स्वागत किया गया। बैठक के प्रारंभ में ही प्रभारी मंत्री ने कहा कि जिला कार्यक्रम एवं कार्यान्वयन समिति केवल एक औपचारिक मंच नहीं है, बल्कि यह जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और उनके समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का माध्यम है।

बैठक के दौरान विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों को समिति के समक्ष रखा। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पेयजल, सिंचाई, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा ग्रामीण एवं शहरी विकास से संबंधित समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि कई योजनाओं के क्रियान्वयन में अभी भी अपेक्षित गति नहीं दिखाई दे रही है, जिससे आम लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं की निगरानी बढ़ाने और जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने की मांग की।

सड़क एवं परिवहन से जुड़े मुद्दे बैठक में प्रमुखता से उठाए गए। कई क्षेत्रों में जर्जर सड़कों की मरम्मत, नई सड़कों के निर्माण तथा ग्रामीण संपर्क मार्गों को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बेहतर सड़क नेटवर्क न केवल लोगों की आवाजाही को आसान बनाता है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है। प्रभारी मंत्री ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को इन मामलों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। जनप्रतिनिधियों ने विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता, शिक्षकों की उपस्थिति, स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की तैनाती तथा दवाओं की उपलब्धता जैसे मुद्दे उठाए। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य ऐसे क्षेत्र हैं जिनका सीधा संबंध आम जनता के जीवन स्तर से है, इसलिए इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।

बिजली, पेयजल और सिंचाई व्यवस्था से संबंधित समस्याएं भी बैठक में प्रमुखता से सामने आईं। कई जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीण इलाकों में नियमित बिजली आपूर्ति, पेयजल संकट तथा किसानों के लिए बेहतर सिंचाई सुविधाओं की मांग की। मंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि इन मुद्दों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।

ग्रामीण विकास और नगर निगम से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए जनप्रतिनिधियों ने कार्यों में तेजी लाने की आवश्यकता बताई। सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आवास योजनाओं तथा अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया। बैठक में कहा गया कि सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचना चाहिए और इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सतत निगरानी जरूरी है।

बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री दामोदर रावत का सबसे सख्त रुख अधिकारियों की उपस्थिति को लेकर देखने को मिला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों में सभी संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य है। यदि कोई अधिकारी बिना पूर्व अनुमति के बैठक से अनुपस्थित पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि ऐसे अधिकारियों के एक दिन के वेतन की कटौती की जाएगी। मंत्री के इस निर्देश को प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्याओं को सरकार के सामने रखते हैं और उन समस्याओं का समाधान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसलिए अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लेना चाहिए और निर्धारित समय सीमा के भीतर उनका निष्पादन सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी से जनता का विश्वास प्रभावित होता है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

बैठक में जिले के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सांसद शांभवी चौधरी, विधायक महेश्वर हजारी, अश्वमेघ देवी, राजकुमार राय, वीरेंद्र कुमार, राजेश कुमार सिंह, विधान पार्षद तरुण कुमार, समिति के उपाध्यक्ष दुर्गेश राय, वरिष्ठ नेता उपेंद्र कुमार कुशवाहा और नगर निगम की मेयर अनीता राम सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने अपने सुझाव और मांगें रखीं। इसके अलावा विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

बैठक के अंत में प्रभारी मंत्री ने सभी विभागों को विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा करने और लंबित मामलों को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट है कि विकास योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचे और इसके लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में विकास कार्यों की प्रगति की लगातार निगरानी की जाएगी और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जिला कार्यक्रम एवं कार्यान्वयन समिति की यह बैठक केवल समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने प्रशासनिक जवाबदेही, जनप्रतिनिधियों की भागीदारी और विकास कार्यों की गति को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। प्रभारी मंत्री के सख्त निर्देशों के बाद अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभिन्न विभाग जनहित से जुड़े मुद्दों पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ कार्रवाई करते हैं।

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